सारंगढ़। छत्तीसगढ़ के सारंगढ़-बिलाईगढ़ जिले के जनपद पंचायत बरमकेला कार्यालय की पुरानी मनरेगा शाखा की बदहाल स्थिति सामने आने के बाद सरकारी व्यवस्था और रिकॉर्ड प्रबंधन पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। कार्यालय के एक कमरे में सरकारी दस्तावेज बिखरे पड़े हैं, जबकि कमरे में गंदगी और दुर्गंध का भी आलम बताया जा रहा है। सबसे संवेदनशील तस्वीर उस समय सामने आई, जब महान विभूति मिनी माता की तस्वीर भी कचरे के बीच पड़ी दिखाई दी।
पुरानी मनरेगा शाखा में जिस तरह महत्वपूर्ण सरकारी अभिलेखों को बेतरतीब तरीके से रखा गया है, उससे उनकी सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ गई है। सरकारी रिकॉर्ड में योजनाओं, कार्यों, भुगतान, स्वीकृतियों और प्रशासनिक निर्णयों से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारी दर्ज होती है। ऐसे में इन दस्तावेजों का सुरक्षित और व्यवस्थित तरीके से संरक्षण जरूरी है। सवाल यह है कि यदि लापरवाही के चलते कोई रिकॉर्ड खराब या गुम हो जाता है तो इसकी जिम्मेदारी आखिर किस अधिकारी या कर्मचारी की होगी।
मिनी माता की तस्वीर का कचरे के बीच पड़ा होना भी कार्यालय की संवेदनशीलता और रखरखाव व्यवस्था पर सवाल खड़ा करता है। यदि तस्वीर को सम्मानजनक स्थान पर रखने की व्यवस्था नहीं थी तो उसे कार्यालय में लगाने के बाद उसकी देखरेख क्यों नहीं की गई, यह भी जांच का विषय है।
कार्यालय की स्थिति को लेकर अधिकारी-कर्मचारियों की जवाबदेही पर भी सवाल उठ रहे हैं। कौन अधिकारी किस शाखा का प्रभारी है, रिकॉर्ड किसके संरक्षण में हैं और कार्यालय की साफ-सफाई एवं रखरखाव की जिम्मेदारी किसकी है, इसकी स्पष्ट जानकारी सामने आना जरूरी है। मुख्य कार्यपालन अधिकारी की जिम्मेदारी केवल फाइलों के निपटारे तक सीमित नहीं होती, बल्कि कार्यालयीन अनुशासन, रिकॉर्ड प्रबंधन और कर्मचारियों की जवाबदेही पर निगरानी रखना भी प्रशासनिक दायित्व का हिस्सा है।
ऐसे में पुरानी मनरेगा शाखा की स्थिति की स्थलीय जांच कराने की मांग उठ रही है। जांच में सरकारी दस्तावेजों की स्थिति, रिकॉर्ड संरक्षण की व्यवस्था, साफ-सफाई, मिनी माता की तस्वीर कचरे में पहुंचने की वजह और संबंधित अधिकारी-कर्मचारियों की जिम्मेदारी तय की जानी चाहिए। साथ ही कार्यालय में उपस्थिति व्यवस्था और शाखावार जिम्मेदारियों की भी समीक्षा जरूरी है।
बरमकेला जनपद कार्यालय की यह स्थिति सिर्फ साफ-सफाई का मुद्दा नहीं, बल्कि सरकारी रिकॉर्ड की सुरक्षा, प्रशासनिक जवाबदेही और सरकारी संस्थान की गरिमा से जुड़ा मामला है। अब देखना होगा कि संबंधित अधिकारी इस मामले में क्या कदम उठाते हैं और क्या जिम्मेदारी तय कर व्यवस्था में सुधार किया जाता है।



