नई दिल्ली। नीट पेपर लीक विवाद के बीच केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे से पहले सरकार और कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के बीच हुई बातचीत में एक महत्वपूर्ण मोड़ सामने आया। सूत्रों के अनुसार, सरकार ने गतिरोध समाप्त करने के लिए धर्मेंद्र प्रधान का मंत्रालय बदलने का प्रस्ताव रखा था, लेकिन CJP ने इसे अस्वीकार करते हुए साफ कर दिया कि वह केवल उनके इस्तीफे से ही संतुष्ट होगी।
सूत्रों के मुताबिक, जंतर-मंतर पर चल रहे प्रदर्शन के दौरान सरकार और CJP के बीच तीन दौर की वार्ता हुई। सरकार की ओर से केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा और जितेंद्र सिंह ने बातचीत की जिम्मेदारी संभाली। वार्ता के दौरान उन्होंने CJP के प्रतिनिधियों सौरव दास और आशुतोष रांका के सामने धर्मेंद्र प्रधान का विभाग बदलने का विकल्प रखा और कहा कि किसी मंत्री का विभाग बदलना या उन्हें हटाना प्रधानमंत्री का विशेषाधिकार है।
हालांकि CJP ने इस प्रस्ताव को सिरे से खारिज कर दिया। पार्टी का स्पष्ट रुख था कि आंदोलन की शुरुआत ही धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर हुई है, इसलिए मंत्रालय बदलना समाधान नहीं माना जा सकता। पार्टी नेताओं का यह भी मानना था कि यदि इस्तीफे से कम पर सहमति बनाई जाती, तो आंदोलन में शामिल कार्यकर्ताओं और समर्थकों के बीच गलत संदेश जाता।
बताया जा रहा है कि 25 जुलाई को तीसरे दौर की बातचीत शुरू होने से पहले ही धर्मेंद्र प्रधान ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री पद से इस्तीफा दे दिया। इस्तीफे के बाद उन्होंने सोशल मीडिया पर एक भावुक संदेश साझा करते हुए कहा कि पिछले दस दिनों की घटनाओं ने उन्हें गहरा दुख पहुंचाया है और यह मामला उनके लिए व्यक्तिगत प्रतिष्ठा का विषय नहीं था।
इस्तीफे के बाद पहली बार लोकसभा पहुंचने पर धर्मेंद्र प्रधान ने कहा, “मैं स्ट्रीट फाइटर हूं।” इस दौरान एनडीए सांसदों ने उनका स्वागत भी किया।
प्रधान के इस्तीफे के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने केंद्रीय मंत्री प्रह्लाद जोशी को शिक्षा मंत्रालय की जिम्मेदारी सौंपी। उन्होंने 26 जुलाई को पदभार ग्रहण कर लिया। सूत्रों का कहना है कि धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के साथ ही CJP की अन्य प्रमुख मांगों पर भी सहमति बन गई, जिसके बाद आंदोलन और सरकार के बीच बना गतिरोध समाप्त हो गया।





