नई दिल्ली/विक्टोरिया: हिंद महासागर की भू-राजनीतिक बिसात पर भारत और चीन के बीच शह-मात का खेल तेज हो गया है। चीन द्वारा लगातार की जा रही ‘स्ट्रिंग ऑफ पर्ल्स’ (भारत की घेराबंदी) की कोशिशों के बीच भारत ने भी अपनी रणनीतिक चाल चल दी है। बंगाल की खाड़ी में बांग्लादेश के मोंगला पोर्ट तक चीन की पहुंच होने के बाद, भारत ने पश्चिमी हिंद महासागर के अत्यंत महत्वपूर्ण द्वीपीय देश सेशेल्स के साथ अपने रिश्तों को नए शिखर पर पहुंचाकर चीन के मंसूबों पर पानी फेर दिया है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सेशेल्स यात्रा को इस दिशा में बेहद गेम-चेंजर माना जा रहा है, जिसने हिंद महासागर में शक्ति संतुलन को भारत के पक्ष में झुका दिया है।
चीन की घेराबंदी: मोंगला से लेकर ग्वादर तक का जाल
बीते कुछ सालों में बीजिंग ने अपने ‘बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव’ (BRI) के तहत भारत के पड़ोसी देशों में भारी निवेश किया है। चीन की इस रणनीति के प्रमुख पड़ाव हैं:
- बांग्लादेश: हाल ही में मोंगला पोर्ट के विकास को लेकर हुआ समझौता।
- श्रीलंका: कर्ज के जाल में फंसाकर हम्बनटोटा बंदरगाह पर नियंत्रण।
- पाकिस्तान: ग्वादर पोर्ट का विकास।
- जिबूती: अफ्रीका के हॉर्न पर नौसैनिक अड्डे की स्थापना।
इन बंदरगाहों और लॉजिस्टिक्स नेटवर्क के जरिए चीन सीधे तौर पर भारत के प्रभुत्व को चुनौती देने और भारतीय समुद्री मार्गों पर नजर रखने की कोशिश में है।
छोटा मुल्क, विशाल ताकत: क्यों खास है सेशेल्स?
क्षेत्रफल के लिहाज से महज 460 वर्ग किलोमीटर और करीब एक लाख की आबादी वाला सेशेल्स पहली नजर में भले ही छोटा दिखे, लेकिन इसकी रणनीतिक अहमियत विशाल है:
- व्यस्ततम समुद्री मार्ग: इसके 115 द्वीप ऐसे समुद्री इलाके में फैले हैं, जहां से दुनिया का सबसे व्यस्त व्यापारिक रूट गुजरता है। एशिया, अफ्रीका और पश्चिम एशिया को जोड़ने वाले इसी रास्ते से रोजाना लाखों बैरल कच्चा तेल, एलएनजी और कार्गो कंटेनर गुजरते हैं।
- विशाल EEZ: जमीन पर छोटा होने के बावजूद सेशेल्स का विशेष आर्थिक क्षेत्र (EEZ) लगभग 13 लाख वर्ग किलोमीटर में फैला हुआ है।
सुरक्षा का मजबूत नेटवर्क: इतने बड़े समुद्री क्षेत्र की निगरानी अकेले सेशेल्स के लिए असंभव थी। भारत ने इसी जरूरत को भांपा और सेशेल्स को डोर्नियर समुद्री निगरानी विमान, तेज गश्ती नौकाएं, तटीय निगरानी रडार नेटवर्क और सैन्य प्रशिक्षण मुहैया कराया।
चीन के ‘कर्ज जाल’ बनाम भारत का ‘भरोसा मॉडल’
भारत की रणनीति चीन के ‘डेट-ट्रैप’ (कर्ज आधारित इंफ्रास्ट्रक्चर) से बिल्कुल अलग है। विदेश सचिव विक्रम मिस्री के अनुसार, भारत किसी भी देश में परियोजनाएं वहां की सरकार और जनता की आपसी सहमति से ही आगे बढ़ाता है।
यही कारण है कि आज भारत-सेशेल्स की साझेदारी सिर्फ रक्षा तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें शामिल हैं:
- डिजिटल गवर्नेंस और फिनटेक
- स्वास्थ्य और शिक्षा
- ब्लू इकोनॉमी और अक्षय ऊर्जा
- जलवायु परिवर्तन और आपदा प्रबंधन
‘सागर’ से ‘महासागर’ तक का सफर
साल 2015 में पीएम मोदी ने ‘SAGAR’ (Security and Growth for All in the Region) का विजन दिया था, जिसके तहत कोस्टल सर्विलांस रडार सिस्टम की शुरुआत हुई थी। अब वर्ष 2026 की इस यात्रा के साथ दोनों देशों के बीच 50 वर्षों के राजनयिक संबंधों का जश्न मनाया जा रहा है और इस नीति को अपग्रेड कर ‘MAHASAGAR’ (Mutual and Holistic Advancement for Security and Growth Across Region) का रूप दिया जा रहा है।
इसका सीधा मतलब यह है कि भारत अब सिर्फ समुद्र की निगरानी नहीं करेगा, बल्कि अपने साझेदारों के साथ डिजिटल कनेक्टिविटी, खाद्य सुरक्षा और मजबूत सप्लाई चेन का एक अटूट नेटवर्क तैयार कर रहा है।

