मुजफ्फराबाद। पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (पीओके) में चल रहे जन आंदोलन ने फिलहाल नया मोड़ ले लिया है। जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी (JAAC) ने पाकिस्तान सरकार के साथ हुई बातचीत के बाद अपने प्रस्तावित ‘लॉन्ग मार्च’ को 21 जुलाई तक के लिए स्थगित कर दिया है। हालांकि, संगठन ने स्पष्ट किया है कि क्षेत्रभर में जारी धरना-प्रदर्शन और विरोध कार्यक्रम पहले की तरह जारी रहेंगे।
प्रदर्शनकारी संगठन ने पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ के नेतृत्व वाली सरकार को 21 जुलाई तक अपनी मांगों पर ठोस कार्रवाई करने का अंतिम अवसर दिया है। JAAC का कहना है कि यदि तय समय सीमा तक उनकी मांगें पूरी नहीं होतीं, तो 22 जुलाई से मुजफ्फराबाद की ओर प्रस्तावित लॉन्ग मार्च दोबारा शुरू कर दिया जाएगा।
संगठन के नेताओं का कहना है कि सरकार के साथ बातचीत में कुछ सकारात्मक संकेत मिले हैं, लेकिन अभी तक उनकी प्रमुख मांगों पर कोई ठोस निर्णय सामने नहीं आया है। इसी कारण आंदोलन को पूरी तरह समाप्त करने के बजाय केवल अस्थायी रूप से स्थगित किया गया है।
JAAC ने कहा कि जब तक सरकार उनकी मांगों को स्वीकार नहीं करती, तब तक पीओके के विभिन्न क्षेत्रों में धरने और विरोध प्रदर्शन जारी रहेंगे। संगठन ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि सरकार ने समय रहते उचित कदम नहीं उठाए, तो आंदोलन को और व्यापक रूप दिया जाएगा।
गौरतलब है कि पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर में पिछले कुछ समय से विभिन्न मुद्दों को लेकर जनता के बीच असंतोष बढ़ता जा रहा है। इसी के चलते JAAC लगातार विरोध प्रदर्शन कर रहा है और सरकार पर जनहित से जुड़े मुद्दों के समाधान का दबाव बना रहा है।

