नोएडा:
नोएडा पुलिस ने नशे के काले कारोबार के खिलाफ एक बड़ी सफलता हासिल की है। पुलिस ने हाई-प्रोफाइल माने जाने वाले सेक्टर-18 क्षेत्र से मादक पदार्थों की तस्करी में शामिल एक महिला गिरोह का पर्दाफाश किया है। इस कार्रवाई के तहत पुलिस ने 5 महिला तस्करों को रंगे हाथों गिरफ्तार किया है, जिनके पास से भारी मात्रा में गांजा बरामद हुआ है।
6 किलो से अधिक अवैध गांजा बरामद
थाना सेक्टर-20 पुलिस को मुखबिर से मिली पुख्ता सूचना के आधार पर सेक्टर-18 इलाके में घेराबंदी की गई थी। तलाशी के दौरान इन महिलाओं के कब्जे से 6 किलो 100 ग्राम अवैध गांजा बरामद किया गया है। पुलिस ने तत्काल प्रभाव से नशीले पदार्थों को जब्त कर लिया और सभी आरोपियों के खिलाफ एनडीपीएस (NDPS) एक्ट के तहत गंभीर धाराओं में मामला दर्ज कर उन्हें जेल भेज दिया है।
चोरी और लूट का पुराना इतिहास: दिल्ली-लखनऊ में दर्ज हैं मामले
पुलिस की शुरुआती जांच में जो खुलासा हुआ है, उसने अधिकारियों को भी चौंका दिया है। पकड़ी गई महिलाएं सिर्फ नशा तस्करी ही नहीं, बल्कि अन्य संगीन अपराधों में भी लिप्त रही हैं।
- बड़ा आपराधिक रिकॉर्ड: इन महिलाओं का पुराना और लंबा आपराधिक इतिहास रहा है।
- कई राज्यों में नेटवर्क: इनके खिलाफ देश की राजधानी दिल्ली, लखनऊ और आगरा के विभिन्न थानों में चोरी, झपटमारी और लूटपाट के कई आपराधिक मामले पहले से ही दर्ज हैं। यह गिरोह अलग-अलग शहरों में अपनी पहचान बदलकर वारदातों को अंजाम देता था।
मुख्य सप्लायर की तलाश में जुटी पुलिस
नोएडा पुलिस अब इस गिरोह की जड़ों तक पहुंचने की कोशिश कर रही है। पकड़ी गई महिलाओं से कड़ाई से पूछताछ की जा रही है ताकि यह पता लगाया जा सके कि वे यह गांजा कहां से लाती थीं और नोएडा के किन-किन इलाकों या कॉलेज-यूनिवर्सिटी के छात्रों तक इसे सप्लाई किया जाना था। पुलिस का दावा है कि जल्द ही इनके मुख्य सप्लायरों और पूरे नेटवर्क को ध्वस्त कर दिया जाएगा।
नोएडा पुलिस की इस मुस्तैदी ने दिल्ली-NCR में सक्रिय अंतरराज्यीय महिला अपराधी गिरोह को बैकफुट पर धकेल दिया है। पुलिस की इस कार्रवाई से ड्रग माफियाओं में हड़कंप मचा हुआ है।
नौकरी और आर्थिक मदद का आश्वासन: पीड़ित परिवार को जिला प्रशासन की ओर से वित्तीय सहायता और संविदा (कॉन्ट्रैक्ट) पर सरकारी नौकरी देने का भरोसा दिया गया है।
हाई-लेवल जांच: मौत के सही कारणों का पता लगाने के लिए प्रशासन ने एक विशेष मेडिकल बोर्ड का गठन किया है, जो पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर रिपोर्ट सौंपेगा।
स्वास्थ्य मंत्री के अपने क्षेत्र में हुई इस घटना ने जहां एक तरफ सरकारी अस्पतालों की लचर व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं, वहीं दूसरी तरफ डॉक्टरों की हड़ताल ने आम जनता की मुसीबतें बढ़ा दी हैं। अब देखना होगा कि मेडिकल बोर्ड की जांच में क्या तथ्य सामने आते हैं और प्रशासन डॉक्टरों को काम पर वापस लौटाने में कब तक कामयाब होता है।
मुख्य स्रोत: India.Com – Hindi





