पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (PoK) में जारी विरोध प्रदर्शनों के बीच प्रदर्शनकारी संगठनों ने पाकिस्तान सरकार और सुरक्षा बलों पर गंभीर आरोप लगाए हैं। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि पिछले 38 दिनों के दौरान कई लोगों की मौत हुई है और मृतकों के शव परिजनों को नहीं सौंपे गए हैं। इन दावों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हो सकी है।
रावलकोट के ईदगाह मैदान में आयोजित सभा में प्रदर्शनकारी नेताओं ने कहा कि मुजफ्फराबाद की ओर प्रस्तावित मार्च को 21 जुलाई तक स्थगित किया गया है, ताकि सरकार को बातचीत का एक और अवसर दिया जा सके।
प्रदर्शन के प्रमुख आयोजकों में शामिल सरदार अमान खान ने आरोप लगाया कि कई प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया गया है और घायलों को भी अस्पतालों से सुरक्षा एजेंसियां अपने साथ ले गईं। उन्होंने मांग की कि सभी हिरासत में लिए गए लोगों को रिहा किया जाए और मृतकों के शव उनके परिवारों को सौंपे जाएं।
सभा के दौरान अमान खान ने प्रशासन और सुरक्षा बलों की कार्रवाई की आलोचना की और कहा कि यदि जनता की मांगों पर ध्यान नहीं दिया गया तो आंदोलन और तेज किया जाएगा। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि फिलहाल सरकार को बातचीत के लिए समय दिया जा रहा है।
इस बीच, PoK में 27 जुलाई को प्रस्तावित चुनाव को लेकर भी प्रदर्शनकारियों ने अपनी बात रखी। उनका कहना है कि चुनाव तभी स्वीकार किए जाएंगे, जब वे निष्पक्ष और पारदर्शी तरीके से कराए जाएंगे। यदि चुनाव प्रक्रिया में धांधली हुई तो उसका विरोध किया जाएगा।
प्रदर्शनकारियों का मुख्य आरोप है कि सुरक्षा बलों ने आंदोलन के दौरान बल प्रयोग किया, जबकि सरकार की ओर से इन आरोपों पर अलग-अलग समय पर अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आई हैं। इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध नहीं है।
बुधवार को पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी (PPP) की ओर से पूर्व प्रधानमंत्री राजा परवेज अशरफ को प्रदर्शनकारियों से बातचीत के लिए भेजा गया। वहीं, पाकिस्तान ओवरसीज फाउंडेशन के अध्यक्ष कमर रज़ा भी प्रतिनिधिमंडल के साथ पहुंचे। प्रदर्शनकारियों ने दावा किया कि वे सेना प्रमुख की ओर से आए थे, लेकिन पाकिस्तान ओवरसीज फाउंडेशन ने इस दावे का खंडन करते हुए कहा कि कमर रज़ा किसी सैन्य प्रतिनिधि के रूप में नहीं गए थे।
फिलहाल PoK में स्थिति तनावपूर्ण बनी हुई है। प्रदर्शनकारी अपनी मांगों पर अड़े हैं, जबकि सरकार बातचीत के जरिए समाधान निकालने की कोशिश कर रही है। आने वाले दिनों में यह स्पष्ट होगा कि वार्ता आगे बढ़ती है या आंदोलन फिर से तेज होता है।





