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संसद मार्च से पहले सोनम वांगचुक का बड़ा ऐलान, इन 3 शर्तों पर ही खत्म करेंगे भूख हड़ताल

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नई दिल्ली: शिक्षा व्यवस्था में सुधार, पेपर लीक और युवाओं के भविष्य से जुड़े मुद्दों को लेकर आमरण अनशन पर बैठे सामाजिक कार्यकर्ता Sonam Wangchuk ने संसद मार्च से पहले बड़ा ऐलान किया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि उनका अनशन केवल तब समाप्त होगा, जब उनकी ओर से रखी गई तीन अहम शर्तों पर सरकार या राजनीतिक दलों की ओर से ठोस आश्वासन मिलेगा।सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर जारी अपने संदेश में वांगचुक ने कहा कि उनकी सेहत लगातार बिगड़ रही है, लेकिन उनका संकल्प कमजोर नहीं पड़ा है। उन्होंने कहा कि यह लड़ाई किसी व्यक्ति या दल के खिलाफ नहीं, बल्कि देश की शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता, जवाबदेही और युवाओं के भविष्य को सुरक्षित करने के लिए है।

ये हैं सोनम वांगचुक की तीन शर्तें


पहली शर्त:
वांगचुक ने कहा कि सरकार को हाल के वर्षों में सामने आए पेपर लीक, परीक्षा प्रणाली की खामियों और शिक्षा व्यवस्था की विफलताओं की जिम्मेदारी स्वीकार करनी चाहिए। उनका मानना है कि जब तक जवाबदेही तय नहीं होगी, तब तक सुधार संभव नहीं है।

दूसरी शर्त:उन्होंने कहा कि यदि उन्हें और उनके साथियों को संसद तक पहुंचने की अनुमति दी जाती है तथा विभिन्न राजनीतिक दलों के सांसद यह भरोसा देते हैं कि वे मानसून सत्र में शिक्षा सुधार और युवाओं से जुड़े मुद्दों को प्रमुखता से उठाएंगे, तो वह अपना अनशन समाप्त कर देंगे।

तीसरी शर्त:अगर स्वास्थ्य कारणों या अन्य परिस्थितियों के चलते वह संसद तक नहीं पहुंच पाते हैं, तो विभिन्न दलों के सांसद और नेता सफदरजंग अस्पताल आकर उन्हें यह आश्वासन दें कि शिक्षा सुधार और जवाबदेही का मुद्दा संसद में मजबूती से उठाया जाएगा।

‘मुझे गैर-कानूनी तरीके से रोका गया’

वांगचुक ने आरोप लगाया कि उन्हें सफदरजंग अस्पताल में गैर-कानूनी तरीके से रखा गया है। उन्होंने कहा कि उनकी आवाजाही, लोगों से मिलने और अपनी बात रखने की स्वतंत्रता सीमित कर दी गई है। उनका कहना है कि लोकतांत्रिक तरीके से अपनी मांग रखने का अधिकार हर नागरिक को होना चाहिए।

पत्नी ने भी रखी साफ शर्त

इससे पहले उनकी पत्नी Geetanjali J. Angmo ने कहा था कि यदि विभिन्न राजनीतिक दलों के सांसद अस्पताल पहुंचकर यह भरोसा देंगे कि वे संसद के मानसून सत्र में शिक्षा सुधार, परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता और जवाबदेही का मुद्दा मजबूती से उठाएंगे, तभी वांगचुक अपना अनशन समाप्त करेंगे।

शिक्षा और युवाओं के भविष्य की लड़ाई

वांगचुक का कहना है कि उनका आंदोलन किसी राजनीतिक उद्देश्य से प्रेरित नहीं है। उनका मुख्य लक्ष्य देश की शिक्षा व्यवस्था में सुधार, पेपर लीक जैसी घटनाओं पर रोक, निष्पक्ष परीक्षा प्रणाली और युवाओं के भविष्य को सुरक्षित बनाना है। उनका मानना है कि शिक्षा व्यवस्था में सुधार के लिए सरकार और सभी राजनीतिक दलों को मिलकर जवाबदेही निभानी होगी।फिलहाल सभी की निगाहें संसद मार्च और सरकार के अगले कदम पर टिकी हैं। अब यह देखना होगा कि वांगचुक की मांगों पर राजनीतिक दल क्या रुख अपनाते हैं और उनका अनशन कब समाप्त होता है।

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