रायपुर। छत्तीसगढ़ में इस बार स्वतंत्रता दिवस का उत्सव कई मायनों में ऐतिहासिक होने जा रहा है। भारतीय जनता पार्टी ने अपने ‘हर घर तिरंगा’ अभियान को नक्सल प्रभावित क्षेत्रों तक पहुंचाने की तैयारी पूरी कर ली है। तीन दशक तक नक्सलियों के प्रभाव में रहे और अब नक्सल मुक्त घोषित किए जा चुके गांवों में पहली बार पूरे उत्साह के साथ तिरंगा फहराया जाएगा। इन गांवों में तिरंगा यात्राएं निकालकर आजादी, लोकतंत्र और विकास का संदेश दिया जाएगा।
पार्टी ने ऐसे गांवों की पहचान शुरू कर दी है, जहां वर्षों तक नक्सली फरमानों और भय के कारण राष्ट्रीय ध्वज नहीं फहराया जा सका था। अब उन्हीं इलाकों में तिरंगा शान से लहराएगा। भाजपा का मानना है कि यह केवल एक अभियान नहीं, बल्कि उन क्षेत्रों में सामान्य जीवन, लोकतांत्रिक व्यवस्था और विकास की वापसी का प्रतीक होगा।
इस बार अभियान की सबसे विशेष बात आत्मसमर्पण कर चुके पूर्व नक्सलियों की भागीदारी होगी। मुख्यधारा में लौट चुके ये लोग तिरंगा यात्राओं में शामिल होकर शांति, सामाजिक पुनर्वास और नए विश्वास का संदेश देंगे। पार्टी का कहना है कि यह बदलाव की नई तस्वीर पेश करेगा और समाज में सकारात्मक वातावरण को मजबूत करेगा।
11 से 15 अगस्त तक चलने वाले इस अभियान के दौरान प्रदेश के सभी जिलों और मंडलों में तिरंगा यात्राएं, पदयात्राएं और राष्ट्रभक्ति से जुड़े कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। प्रत्येक मंडल मुख्यालय के साथ कम से कम पांच बड़े गांवों या प्रमुख बाजारों में भी तिरंगा यात्रा निकाली जाएगी। अभियान की जिम्मेदारी भारतीय जनता युवा मोर्चा को सौंपी गई है।
भाजपा ने अभियान को जनभागीदारी का स्वरूप देने के लिए स्कूल-कॉलेजों के विद्यार्थियों, महिला समूहों, सामाजिक संगठनों, पूर्व सैनिकों, सुरक्षा बलों और स्थानीय नागरिकों को भी जोड़ने की योजना बनाई है। जिला मुख्यालयों पर महिलाओं और युवतियों की विशेष बाइक तिरंगा यात्रा आयोजित की जाएगी, जिसके माध्यम से राष्ट्रभक्ति के साथ महिला सशक्तिकरण का संदेश भी दिया जाएगा।
अभियान के दौरान शहीद सैनिकों और ड्यूटी के दौरान बलिदान देने वाले पुलिसकर्मियों के परिवारों का सम्मान भी किया जाएगा। विशेष रूप से नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में भाजपा कार्यकर्ता शहीद परिवारों के घर पहुंचकर उन्हें तिरंगा भेंट करेंगे और उनके योगदान को नमन करेंगे।
इसी क्रम में 14 अगस्त को प्रदेशभर में ‘विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस’ मनाया जाएगा। सभी जिलों में मौन जुलूस निकाले जाएंगे तथा देश विभाजन की पीड़ा झेलने वाले परिवारों का सम्मान किया जाएगा। सीमावर्ती क्षेत्रों में भाजपा के वरिष्ठ नेता सीमा चौकियों पर पहुंचकर सुरक्षा बलों के जवानों का अभिनंदन करेंगे।
बस्तर और अन्य पूर्व नक्सल प्रभावित इलाकों में तिरंगा फहराना अब केवल राष्ट्रीय पर्व का आयोजन नहीं, बल्कि बदले हुए हालात की तस्वीर भी माना जा रहा है। जिन गांवों में कभी नक्सलियों के भय के कारण तिरंगा फहराना संभव नहीं था, वहां आज राष्ट्रीय ध्वज के साथ तिरंगा यात्राओं की तैयारी हो रही है। सुरक्षा व्यवस्था के विस्तार, सड़क और बुनियादी ढांचे के विकास तथा लगातार चलाए गए अभियानों के बाद इन क्षेत्रों में आए बदलाव को भाजपा अपने इस अभियान के माध्यम से जन-जन तक पहुंचाने की तैयारी में है।





