राम मंदिर ट्रस्ट से जुड़े कथित वित्तीय अनियमितताओं के आरोपों ने राजनीतिक सरगर्मियां तेज कर दी हैं। शिवसेना (यूबीटी) के राज्यसभा सांसद संजय राउत ने ट्रस्ट में जमा दान राशि के प्रबंधन और उसके उपयोग को लेकर गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने मांग की है कि पूरे मामले की निष्पक्ष और पारदर्शी जांच कराई जाए ताकि श्रद्धालुओं के बीच किसी तरह का भ्रम न रहे।
मीडिया से बातचीत के दौरान राउत ने दावा किया कि उनकी पार्टी ने राम मंदिर निर्माण के लिए एक करोड़ रुपये की आर्थिक सहायता और चार किलोग्राम चांदी की ईंट भेंट की थी। उनका आरोप है कि वर्षों बीत जाने के बावजूद इस दान की कोई आधिकारिक रसीद उपलब्ध नहीं कराई गई और न ही चांदी की ईंट का कोई सार्वजनिक रिकॉर्ड सामने आया है। उन्होंने कहा कि मंदिर ट्रस्ट को प्राप्त दान और उसके खर्च का पूरा ब्यौरा सार्वजनिक किया जाना चाहिए।
यह विवाद उस समय और बढ़ गया जब अयोध्या के पूर्व समाजवादी पार्टी विधायक पवन पांडे ने मंदिर में प्राप्त दान राशि के प्रबंधन में कथित वित्तीय गड़बड़ी का आरोप लगाया। शिकायत के बाद उत्तर प्रदेश सरकार ने मामले की जांच के लिए तीन सदस्यीय विशेष जांच दल (एसआईटी) का गठन किया।
जांच के शुरुआती चरण में पुलिस ने दान राशि के प्रबंधन से जुड़े आठ लोगों के खिलाफ मामला दर्ज कर उन्हें गिरफ्तार किया है। फिलहाल जांच एजेंसियां वित्तीय लेन-देन, दान से जुड़े दस्तावेजों और अन्य रिकॉर्ड की गहन जांच कर रही हैं, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि किसी स्तर पर अनियमितता हुई है या नहीं।
मामला अब सुप्रीम कोर्ट की दहलीज तक पहुंच चुका है। अदालत में दायर याचिका में राम मंदिर ट्रस्ट के खातों और कथित वित्तीय अनियमितताओं की जांच केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) की निगरानी में गठित विशेष जांच दल से कराने की मांग की गई है।
उधर, विपक्ष इस मुद्दे पर सरकार से जवाबदेही तय करने और पारदर्शी जांच की मांग कर रहा है। वहीं, उत्तर प्रदेश सरकार का कहना है कि जांच निष्पक्ष तरीके से आगे बढ़ रही है और यदि किसी भी स्तर पर वित्तीय अनियमितता या भ्रष्टाचार के प्रमाण मिलते हैं, तो दोषियों के खिलाफ कानून के अनुसार सख्त कार्रवाई की जाएगी। अब पूरे मामले में जांच एजेंसियों की रिपोर्ट और सुप्रीम कोर्ट की अगली सुनवाई पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं।
