पटना: बिहार की राजनीति में बड़ा उलटफेर करते हुए जनसुराज पार्टी के संस्थापक प्रशांत किशोर ने अपने पहले ही चुनाव में ऐतिहासिक जीत दर्ज की है। बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव में उन्होंने भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के उम्मीदवार नीरज कुमार सिन्हा को 18,953 वोटों के बड़े अंतर से हराकर राजनीतिक हलकों में हलचल मचा दी है।
यह जीत इसलिए भी खास मानी जा रही है क्योंकि बांकीपुर विधानसभा सीट पिछले तीन दशकों से भाजपा का मजबूत गढ़ रही थी। उपचुनाव के नतीजों ने राज्य की राजनीति में नए समीकरणों की चर्चा तेज कर दी है।
30 साल पुराना भाजपा का किला ढहा
बांकीपुर विधानसभा सीट भाजपा के वरिष्ठ नेता नितिन नवीन के पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष बनने और राज्यसभा जाने के बाद खाली हुई थी। वर्ष 1990 से यह सीट लगातार भाजपा के कब्जे में रही। पहले नवीन किशोर और उनके निधन के बाद नितिन नवीन ने इस सीट पर भाजपा का दबदबा कायम रखा। लेकिन इस बार प्रशांत किशोर ने इस लंबे राजनीतिक वर्चस्व को समाप्त करते हुए भाजपा का अभेद्य किला ढहा दिया।
राजद तीसरे स्थान पर
उपचुनाव में भाजपा को जहां करारी हार का सामना करना पड़ा, वहीं राष्ट्रीय जनता दल (राजद) भी मुकाबले में पिछड़कर तीसरे स्थान पर रहा। इससे साफ संकेत मिलता है कि मतदाताओं ने इस बार पारंपरिक राजनीतिक समीकरणों से अलग फैसला सुनाया।
जीत के बाद क्या बोले प्रशांत किशोर?
जीत के बाद प्रशांत किशोर ने भाजपा नेतृत्व पर निशाना साधते हुए कहा कि बिहार की जनता वर्तमान नेतृत्व को स्वीकार नहीं कर रही है। उन्होंने कहा कि कोई भी राजनीतिक किला स्थायी नहीं होता और जनता जब बदलाव का मन बना लेती है तो वर्षों पुरानी राजनीतिक पकड़ भी टूट जाती है।
भाजपा ने कहा- करेंगे समीक्षा
उधर, परिणाम आने के बाद बिहार भाजपा अध्यक्ष संजय सरावगी ने कहा कि पार्टी उपचुनाव के नतीजों की समीक्षा करेगी। उन्होंने कहा कि भाजपा ने बांकीपुर के विकास के लिए लगातार काम किया है और भविष्य में भी यह क्षेत्र पार्टी की प्राथमिकताओं में शामिल रहेगा।
बिहार की राजनीति में नए संकेत
बांकीपुर उपचुनाव का परिणाम केवल एक सीट की जीत-हार तक सीमित नहीं माना जा रहा है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह नतीजा बिहार की आगामी राजनीति के लिए महत्वपूर्ण संकेत दे सकता है। पहली बार चुनावी मैदान में उतरे प्रशांत किशोर की यह जीत जनसुराज पार्टी के लिए बड़ा मनोबल बढ़ाने वाली मानी जा रही है।





