चेन्नई: तमिलनाडु विधानसभा के मानसून सत्र में किसानों की समस्याएं प्रमुख मुद्दा बनकर उभरीं। पट्टाली मक्कल काची (PMK) की विधायक सौम्या अंबुमणि ने राज्यपाल के अभिभाषण पर चर्चा के दौरान किसानों की आर्थिक स्थिति, महिला सुरक्षा और क्षेत्रीय विकास से जुड़े कई महत्वपूर्ण मुद्दों को जोरदार तरीके से सदन के सामने रखा।
सौम्या अंबुमणि ने कहा कि राज्य के किसान गंभीर वित्तीय संकट का सामना कर रहे हैं और कर्ज के बोझ के कारण कई परिवार प्रभावित हो रहे हैं। उन्होंने सरकार से मांग की कि महाराष्ट्र की तर्ज पर तमिलनाडु में भी किसानों के सहकारी और वाणिज्यिक बैंकों के ऋणों को माफ करने पर विचार किया जाए, ताकि किसानों को आर्थिक राहत मिल सके।
उन्होंने फसल नुकसान के आकलन की वर्तमान व्यवस्था पर भी सवाल उठाए। विधायक का कहना था कि प्राकृतिक आपदाओं के बाद केवल ड्रोन सर्वे पर निर्भर रहने के बजाय अधिकारियों को मौके पर जाकर वास्तविक स्थिति का मूल्यांकन करना चाहिए, जिससे किसानों को उचित मुआवजा मिल सके।
सरकारी खरीद केंद्रों में किसानों को होने वाली परेशानियों का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि कई स्थानों पर किसानों को अपनी उपज बेचने के लिए लंबे समय तक इंतजार करना पड़ता है। उन्होंने खरीद प्रक्रिया को अधिक प्रभावी और किसान हितैषी बनाने की आवश्यकता बताई।
सदन में बोलते हुए सौम्या अंबुमणि ने जाति आधारित जनगणना कराने के राज्य सरकार के निर्णय का स्वागत किया और इसे सामाजिक न्याय की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया। उन्होंने कहा कि इस पहल से विभिन्न वर्गों की वास्तविक सामाजिक और आर्थिक स्थिति का आकलन करने में मदद मिलेगी।
महिला और बाल सुरक्षा के मुद्दे पर भी उन्होंने चिंता व्यक्त की। उनका कहना था कि महिलाओं और बच्चों के खिलाफ अपराधों को रोकने के लिए कानूनों के प्रभावी क्रियान्वयन के साथ-साथ कड़े दंडात्मक प्रावधानों पर भी गंभीरता से विचार किया जाना चाहिए।
धर्मपुरी जिले के विकास को लेकर उन्होंने पेयजल संकट, औद्योगिक विकास और रोजगार के अवसरों की कमी का मुद्दा उठाया। उन्होंने ‘धर्मपुरी अधिशेष जल योजना’ को शीघ्र लागू करने, सिपकॉट औद्योगिक क्षेत्र को पुनर्जीवित करने और मोराप्पुर-धर्मपुरी रेलवे परियोजना में तेजी लाने की मांग की। उनके अनुसार, इन परियोजनाओं से क्षेत्र में रोजगार और बुनियादी ढांचे के विकास को नई गति मिल सकती है।
विधानसभा में सौम्या अंबुमणि के संबोधन ने किसानों की समस्याओं से लेकर सामाजिक न्याय और क्षेत्रीय विकास तक कई अहम मुद्दों को केंद्र में ला दिया, जिन पर अब सरकार के अगले कदमों पर सबकी नजर रहेगी।

