बेंगलुरु: कर्नाटक कांग्रेस में संगठनात्मक अनुशासन को लेकर छिड़ी चर्चा के बीच राज्य सरकार में मंत्री प्रियांक खरगे ने पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के हालिया रुख का समर्थन करते हुए कहा है कि किसी भी राजनीतिक दल की मजबूती उसके अनुशासन और संगठनात्मक व्यवस्था पर निर्भर करती है।
हाल ही में एक सार्वजनिक कार्यक्रम के दौरान कांग्रेस कार्यकर्ताओं की लगातार नारेबाजी पर मल्लिकार्जुन खरगे ने मंच से नाराजगी व्यक्त की थी। उन्होंने कार्यकर्ताओं से कार्यक्रम की गरिमा बनाए रखने और अनुशासन का पालन करने की अपील की थी। इस घटना का वीडियो सामने आने के बाद राजनीतिक गलियारों में इसकी व्यापक चर्चा शुरू हो गई।
विवाद पर प्रतिक्रिया देते हुए प्रियांक खरगे ने कहा कि पार्टी अध्यक्ष होने के नाते मल्लिकार्जुन खरगे को संगठन के भीतर अनुशासन बनाए रखने और आवश्यक निर्देश जारी करने का पूरा अधिकार है। उन्होंने कहा कि नेतृत्व की जिम्मेदारी केवल कार्यकर्ताओं का मार्गदर्शन करना ही नहीं, बल्कि संगठनात्मक मर्यादाओं की रक्षा करना भी है।
प्रियांक खरगे के अनुसार, किसी भी सार्वजनिक कार्यक्रम में अनुशासन बनाए रखना जरूरी है ताकि पार्टी का संदेश प्रभावी ढंग से जनता तक पहुंच सके। उन्होंने कहा कि कार्यकर्ताओं का उत्साह महत्वपूर्ण है, लेकिन उसे संगठनात्मक नियमों और कार्यक्रम की गरिमा के अनुरूप होना चाहिए।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह बयान ऐसे समय में आया है जब कर्नाटक कांग्रेस के भीतर विभिन्न नेताओं के समर्थकों के शक्ति प्रदर्शन को लेकर चर्चाएं तेज हैं। ऐसे में पार्टी नेतृत्व का यह संदेश स्पष्ट संकेत देता है कि कांग्रेस संगठनात्मक अनुशासन से जुड़े मामलों में कोई ढिलाई बरतने के मूड में नहीं है।
प्रियांक खरगे के समर्थन से यह भी साफ हो गया है कि कांग्रेस नेतृत्व पार्टी के भीतर एकजुटता, अनुशासन और संगठनात्मक मर्यादा को सर्वोच्च प्राथमिकता दे रहा है। माना जा रहा है कि आने वाले समय में पार्टी कार्यक्रमों और गतिविधियों में अनुशासन को लेकर और अधिक सख्त दिशा-निर्देश देखने को मिल सकते हैं।
