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छत्तीसगढ़ के नाम पर फर्जी डिग्रियों का बड़ा खेल: हर महीने पकड़ में आ रहे नकली सर्टिफिकेट, 50 फेक डिग्रियां जांच में उजागर

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रायपुर। छत्तीसगढ़ के चिकित्सा शिक्षा तंत्र के नाम पर फर्जी डिग्रियों और रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट का बड़ा नेटवर्क सामने आया है। छत्तीसगढ़ आयुष विश्वविद्यालय, मेडिकल काउंसिल, नर्सिंग, फार्मेसी और पैरामेडिकल काउंसिल के नाम से नकली डिग्रियां, डिप्लोमा और पंजीयन प्रमाणपत्र तैयार कर देश के कई राज्यों में धड़ल्ले से इस्तेमाल किए जा रहे हैं। चौंकाने वाली बात यह है कि इन फर्जी दस्तावेजों के आधार पर कई लोग सरकारी अस्पतालों और स्वास्थ्य संस्थानों तक में नौकरी हासिल करने में सफल हो चुके हैं।मिली जानकारी के अनुसार, तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, ओडिशा, महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश और बिहार सहित कई राज्यों में छत्तीसगढ़ के नाम पर फर्जी मेडिकल दस्तावेज तैयार किए जा रहे हैं। सत्यापन के दौरान लगातार ऐसे मामले सामने आ रहे हैं, जिससे स्वास्थ्य व्यवस्था की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े हो रहे हैं।

हर महीने सामने आ रहे फर्जी दस्तावेज

सूत्रों के मुताबिक, छत्तीसगढ़ आयुष विश्वविद्यालय में हर महीने करीब 30 डिग्रियां और डिप्लोमा सत्यापन के लिए पहुंचते हैं। इनमें औसतन 5 दस्तावेज फर्जी पाए जाते हैं। वहीं, छत्तीसगढ़ मेडिकल काउंसिल में भी हर महीने 4 से 5 संदिग्ध रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट जांच के लिए आते हैं, जिनमें कई मामलों में जालसाजी की पुष्टि हो चुकी है।

तमिलनाडु से आईं 50 फर्जी डिग्रियां

इस वर्ष जुलाई की शुरुआत में एक अदालती मामले के तहत तमिलनाडु पुलिस के दो कांस्टेबल लगभग 50 संदिग्ध डिग्रियां सत्यापन के लिए छत्तीसगढ़ आयुष विश्वविद्यालय लेकर पहुंचे। जांच में सभी दस्तावेज फर्जी पाए गए। इस घटना ने देशभर में सक्रिय नकली मेडिकल दस्तावेजों के नेटवर्क की गंभीरता को उजागर कर दिया।

पहचान की चोरी और क्लोन रजिस्ट्रेशन का खेल

जांच में केवल फर्जी डिग्रियां ही नहीं, बल्कि पहचान की चोरी (Identity Theft) और क्लोन रजिस्ट्रेशन जैसे गंभीर मामले भी सामने आए हैं।गरियाबंद के एक निजी अस्पताल में कार्यरत एक चिकित्सक के मामले में जांच के दौरान यह पाया गया कि उसने किसी अन्य पंजीकृत डॉक्टर के रजिस्ट्रेशन नंबर का दुरुपयोग कर अपने नाम से चिकित्सा कार्य किया।इसी तरह एक अन्य मामले में एक डॉक्टर के पास अलग-अलग तिथियों वाले दो रजिस्ट्रेशन प्रमाणपत्र मिले। दस्तावेजों में इंटर्नशिप पूरी होने की तारीख तक अलग-अलग दर्ज थी। थर्ड पार्टी ऑडिट में इसे धोखाधड़ी का मामला माना गया।

सरकारी नौकरी तक पहुंच रहे फर्जी डॉक्टर

पिछले वर्षों में ऐसे कई मामले सामने आए, जिनमें फर्जी डिग्री और नकली रजिस्ट्रेशन के आधार पर सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं में नियुक्तियां हासिल की गईं। रायपुर में सामने आए एक चर्चित मामले में एक चिकित्सक करीब सात वर्षों तक बिना वैध डिग्री और पंजीयन के सरकारी सेवा करता रहा। जांच पूरी होने के बाद उसे सेवा से बर्खास्त कर दिया गया।इसी तरह एक अन्य मामले में पैरामेडिकल कर्मचारी के रजिस्ट्रेशन की जांच के दौरान मेडिकल काउंसिल ने स्पष्ट किया कि संबंधित रजिस्ट्रेशन नंबर कभी जारी ही नहीं किया गया था, जिसके बाद प्रमाणपत्र को पूरी तरह फर्जी घोषित किया गया।

आम नामों का दुरुपयोग कर रहे जालसाज

जांच में यह भी सामने आया है कि जालसाज अक्सर रमेश, सुरेश, विनोद, संजय, लता जैसे सामान्य नामों का इस्तेमाल कर फर्जी प्रमाणपत्र तैयार करते हैं। कई मामलों में पहले से जारी वास्तविक रजिस्ट्रेशन नंबर और दस्तावेजों की नकल कर नए नकली प्रमाणपत्र बना दिए जाते हैं, जिससे पहली नजर में उनकी पहचान करना मुश्किल हो जाता है।

पारदर्शी व्यवस्था की कमी बनी बड़ी चुनौती

छत्तीसगढ़ मेडिकल काउंसिल के विशेषज्ञों का कहना है कि वर्तमान व्यवस्था में कई खामियां हैं। मेडिकल काउंसिल में अब तक रजिस्ट्रेशन नवीनीकरण (Renewal) की अनिवार्य प्रणाली लागू नहीं हो सकी है, जबकि अन्य स्वास्थ्य परिषदों में यह व्यवस्था पहले से मौजूद है। ऑफलाइन और ऑनलाइन दोनों तरह के रिकॉर्ड होने से भी जालसाजों को दस्तावेजों में हेराफेरी का मौका मिल जाता है।

सरकार ने दिए सख्त कार्रवाई के संकेत

चिकित्सा शिक्षा मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल ने कहा कि फर्जी डिग्री और रजिस्ट्रेशन के आधार पर नौकरी करने या चिकित्सा प्रैक्टिस करने वालों के खिलाफ लगातार जांच की जा रही है। दस्तावेजों में गड़बड़ी मिलने पर संबंधित व्यक्तियों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी। वहीं, मेडिकल काउंसिल का कहना है कि सत्यापन के दौरान संदिग्ध मामलों की नियमित जांच की जाती है और शिकायत मिलने पर तत्काल कार्रवाई शुरू की जाती है।स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि मरीजों की सुरक्षा और चिकित्सा व्यवस्था की विश्वसनीयता बनाए रखने के लिए डिजिटल सत्यापन प्रणाली, नियमित रजिस्ट्रेशन नवीनीकरण और राष्ट्रीय स्तर पर एकीकृत मेडिकल डेटाबेस की आवश्यकता है। इससे फर्जी डिग्री और पंजीयन के बढ़ते नेटवर्क पर प्रभावी रोक लगाई जा सकेगी।

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