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सोनम वांगचुक को कथित तौर पर जबरन अस्पताल ले जाने पर सियासत तेज, अरविंद केजरीवाल ने केंद्र सरकार पर साधा निशाना

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नई दिल्ली। पर्यावरणविद् और शिक्षा सुधार के लिए आवाज़ उठाने वाले सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक को कथित तौर पर जबरन अस्पताल ले जाने के मामले ने देश की राजनीति में नया विवाद खड़ा कर दिया है। इस घटना के बाद विपक्षी दलों ने केंद्र सरकार पर लोकतांत्रिक अधिकारों के दमन का आरोप लगाया है। आम आदमी पार्टी (आप) के राष्ट्रीय संयोजक और दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने भी इस मुद्दे पर केंद्र सरकार की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए कहा कि किसी भी आंदोलन का समाधान बल प्रयोग नहीं, बल्कि संवाद के माध्यम से निकाला जाना चाहिए।

शनिवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए केजरीवाल ने लिखा, “इतना अहंकार ठीक नहीं है। उन्हें जबरन उठाने की बजाय, मोदी सरकार को सोनम वांगचुक से बात करनी चाहिए थी।” उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में असहमति की आवाज़ को दबाने के बजाय उसकी बात सुनना सरकार की जिम्मेदारी होती है।केजरीवाल ने आगे लिखा कि “आंदोलन को कुचलने की बजाय, देश की शिक्षा और परीक्षा व्यवस्था सुधारने पर ध्यान देना चाहिए। सोनम वांगचुक के साथ की गई ज़बरदस्ती सरकार की हार है।” उनका कहना था कि जनता से जुड़े मुद्दों पर शांतिपूर्ण तरीके से अपनी बात रखने वाले लोगों के साथ सम्मानजनक व्यवहार होना चाहिए।

जंतर-मंतर पर किया था समर्थन

गौरतलब है कि 16 जुलाई को अरविंद केजरीवाल ने जंतर-मंतर पहुंचकर सोनम वांगचुक से मुलाकात की थी। इस दौरान उन्होंने वांगचुक के आंदोलन को समर्थन देते हुए उनकी मांगों को गंभीरता से सुनने और सरकार से बातचीत के जरिए समाधान निकालने की अपील की थी।

विपक्षी दलों ने भी सरकार को घेरा

सोनम वांगचुक को अस्पताल ले जाने की घटना पर कांग्रेस, समाजवादी पार्टी और शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) समेत कई विपक्षी दलों ने भी कड़ी प्रतिक्रिया दी है। विपक्ष का आरोप है कि शांतिपूर्ण विरोध कर रहे लोगों के साथ इस तरह की कार्रवाई लोकतांत्रिक मूल्यों और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के खिलाफ है। विपक्षी नेताओं ने सरकार से संवाद का रास्ता अपनाने और आंदोलनकारियों की मांगों पर गंभीरता से विचार करने की अपील की है।

समर्थकों में नाराज़गी, अनशन शुरू

घटना के बाद सोनम वांगचुक के समर्थकों में भी नाराज़गी देखने को मिली। कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के संस्थापक अभिजीत दीपके ने विरोध स्वरूप अनिश्चितकालीन अनशन शुरू कर दिया है। उनका कहना है कि यदि सरकार आंदोलनकारियों की आवाज़ को दबाने का प्रयास करेगी, तो लोकतांत्रिक तरीके से विरोध जारी रहेगा।

देशभर में छिड़ी बहस

इस घटनाक्रम के बाद सोशल मीडिया पर भी बहस तेज हो गई है। कई सामाजिक संगठनों और नागरिकों ने इस मामले में पारदर्शिता की मांग की है, जबकि बड़ी संख्या में लोग सोनम वांगचुक के समर्थन में अपनी राय व्यक्त कर रहे हैं। वहीं, सरकार के समर्थकों का कहना है कि प्रशासन ने स्वास्थ्य और कानून-व्यवस्था को ध्यान में रखते हुए आवश्यक कदम उठाए होंगे। हालांकि, इस पर संबंधित एजेंसियों की विस्तृत आधिकारिक प्रतिक्रिया का इंतजार है।

क्या है मामला?

सोनम वांगचुक हाल के दिनों में अपनी विभिन्न मांगों को लेकर आंदोलन कर रहे हैं। इसी दौरान उन्हें कथित तौर पर पुलिस और प्रशासन की मौजूदगी में अस्पताल ले जाया गया। इस कार्रवाई के बाद विपक्ष ने इसे लोकतांत्रिक अधिकारों पर हमला बताते हुए सरकार को घेरना शुरू कर दिया है। मामला अब राजनीतिक और सामाजिक दोनों स्तरों पर चर्चा का विषय बन गया है।फिलहाल, इस पूरे घटनाक्रम पर राजनीतिक बयानबाजी लगातार तेज होती जा रही है। एक ओर विपक्ष सरकार की मंशा पर सवाल उठा रहा है, तो दूसरी ओर सरकार की ओर से विस्तृत आधिकारिक प्रतिक्रिया का इंतजार किया जा रहा है। आने वाले दिनों में यह मुद्दा संसद से लेकर सड़क तक राजनीतिक बहस का केंद्र बन सकता है।

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