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कश्मीर के कुलगाम में छत्तीसगढ़ के दो प्रवासी मजदूरों की गोली मारकर हत्या, आतंकियों पर नाम पूछकर निशाना बनाने का आरोप

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श्रीनगर/रायपुर। दक्षिण कश्मीर के कुलगाम जिले में शुक्रवार रात एक दिल दहला देने वाली आतंकी वारदात में छत्तीसगढ़ के दो प्रवासी मजदूरों की गोली मारकर हत्या कर दी गई। दोनों मजदूर ईंट-भट्ठे पर काम कर रहे थे। प्रारंभिक जांच और खुफिया सूत्रों के अनुसार, हमले को द रेजिस्टेंस फ्रंट (TRF) से जुड़े आतंकियों ने अंजाम दिया, जो प्रतिबंधित आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा का सहयोगी माना जाता है।

नाम पूछकर मारी गोली, इलाके में दहशत

जानकारी के अनुसार, शुक्रवार रात करीब 8:30 बजे दो आतंकी मोटरसाइकिल पर सवार होकर कुलगाम के केलाम क्षेत्र स्थित एक ईंट-भट्ठे पर पहुंचे। वहां मौजूद प्रवासी मजदूरों से उनकी पहचान पूछी गई और कथित तौर पर नाम व पहचान की पुष्टि करने के बाद बेहद करीब से गोलीबारी की गई। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, मौके पर 10 से 12 राउंड फायरिंग की आवाज सुनाई दी। घटना के बाद पूरे इलाके में दहशत का माहौल है।

लश्कर आतंकी मोहम्मद लतीफ पर शक

खुफिया सूत्रों के मुताबिक, इस हमले के पीछे मोहम्मद लतीफ का हाथ होने की आशंका है। लतीफ पर इससे पहले 22 जुलाई को अनंतनाग के लाल चौक इलाके में हेड कॉन्स्टेबल आशिक हुसैन कुरैशी की दिनदहाड़े हत्या करने का भी आरोप है। सुरक्षा एजेंसियां मान रही हैं कि इस हमले के जरिए आतंकी संगठन यह संदेश देना चाहता था कि उसका नेटवर्क अब भी सक्रिय है।

सीमा पार से रची गई साजिश की आशंका

जांच एजेंसियों का मानना है कि इस हमले की साजिश पाकिस्तान में बैठे आतंकी हैंडलरों ने रची। सूत्रों के अनुसार, जैश-ए-मोहम्मद से जुड़े वरिष्ठ हैंडलर सज्जाद जट्ट उर्फ सैफुल्ला की भूमिका की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां हमले के सभी पहलुओं की गहन पड़ताल कर रही हैं।

CCTV फुटेज खंगाल रही पुलिस

घटना के बाद पुलिस और सुरक्षा बल मौके पर पहुंच गए। ईंट-भट्ठे पर पहले से लगे CCTV कैमरों की फुटेज जब्त कर ली गई है और हमलावरों की पहचान व गतिविधियों का विश्लेषण किया जा रहा है। उल्लेखनीय है कि पिछले कुछ वर्षों में प्रवासी मजदूरों पर हुए हमलों के बाद ईंट-भट्ठों पर CCTV लगाने के निर्देश दिए गए थे।

पहलगाम हमले जैसी वारदात की आशंका

सुरक्षा एजेंसियां इस हमले की तुलना 22 अप्रैल 2025 को हुए पहलगाम आतंकी हमले से कर रही हैं, जिसमें आतंकियों ने कथित तौर पर पर्यटकों की पहचान पूछकर 26 लोगों की हत्या की थी। जांचकर्ता इस पहलू की भी जांच कर रहे हैं कि क्या दोनों घटनाओं के पीछे एक जैसी रणनीति अपनाई गई।

जम्मू-कश्मीर में बड़ी संख्या में काम करते हैं प्रवासी मजदूर

हर वर्ष लगभग 3 से 5 लाख प्रवासी मजदूर मौसमी और अस्थायी रोजगार के लिए जम्मू-कश्मीर पहुंचते हैं। इनमें बिहार, उत्तर प्रदेश, झारखंड, पश्चिम बंगाल, ओडिशा और छत्तीसगढ़ के श्रमिक बड़ी संख्या में शामिल होते हैं। ये मजदूर निर्माण कार्य, ईंट-भट्ठों, सड़क परियोजनाओं, बागवानी, कृषि, होटल-पर्यटन और छोटे उद्योगों में कार्यरत रहते हैं।

सुरक्षा एजेंसियां अलर्ट, जांच जारी

घटना के बाद पूरे क्षेत्र में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है। पुलिस, सेना और अन्य सुरक्षा एजेंसियां संयुक्त रूप से तलाशी अभियान चला रही हैं। मृतकों की पहचान, हमलावरों की गिरफ्तारी और पूरे आतंकी नेटवर्क का पता लगाने के लिए जांच तेज कर दी गई है।

Anjali

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